अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग का गणतंत्र दिवस – 2026 का संबोधन
प्रिय सहकर्मियों, देवियों और सज्जनों,
सुप्रभात। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आप सभी का हार्दिक स्वागत है। गणतंत्र दिवस भारत के संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य में परिवर्तन का स्मरणोत्सव है, जब 26 जनवरी, 1950 को इसके संविधान को अपनाया गया था। इस अवसर पर, हम डॉ. बी. आर. अंबेडकर जैसे महान दूरदर्शी नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने मसौदा समिति की अध्यक्षता की और 4 नवंबर, 1948 को संविधान सभा में संविधान का अंतिम मसौदा प्रस्तुत किया। जनवरी माह स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और महान भौतिक विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस का जन्म माह भी है, जो भौतिकी और क्वांटम सांख्यिकी के क्षेत्र में अग्रणी थे।.
तिरंगे के नीचे खड़े होकर, आइए हम अपने संविधान में निहित मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प लें और विविधता में एकता को बढ़ावा देने, शांति को प्रोत्साहित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हों कि प्रत्येक नागरिक, चाहे वह किसी भी जाति, पंथ या धर्म का हो, स्वतंत्रता और समानता के लाभों का आनंद ले सके।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य विषय ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’ है, जिसका उप-विषय आत्मनिर्भरता यानी ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर केंद्रित है। जैसा कि आप जानते हैं, ‘वंदे मातरम’ हमारी मातृभूमि के प्रति एक श्रद्धांजलि है और भारत माता को प्रणाम करने का प्रतीक है। इसे 1950 में भारत गणराज्य के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया था और यह राष्ट्रीय गान के समान ही सम्मान साझा करता है।
इस संदर्भ में, मैं यह उल्लेख करना चाहूंगा कि डीएई का दृष्टिकोण राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बिजली उत्पादन से कहीं आगे बढ़कर सामाजिक लाभ के लिए परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करने का है। यह दृष्टिकोण ‘वंदे मातरम’ के आरंभिक श्लोक के अर्थ से पूरी तरह मेल खाता है। आज, आइए हम आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के प्रयासों को बढ़ाकर डीएई के इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।
आज मुझे अत्यंत प्रसन्नता और गर्व का अनुभव हो रहा है जब मैं पिछले एक वर्ष में आत्मनिर्भर पहलों के माध्यम से हमारे विभाग की उपलब्धियों का वर्णन कर रहा हूँ। वर्ष 2025 डीएई के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है क्योंकि “भारत के रूपांतरण के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और विकास (शांति) विधेयक, 2025” संसद द्वारा पारित किया गया और राष्ट्रपति की स्वीकृति भी प्राप्त हुई, जिससे भारत के परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला जा सके और इसके परमाणु ढांचे का आधुनिकीकरण किया जा सके। यह विधेयक भारत की परमाणु यात्रा के अगले चरण को आकार देने में एक महत्वपूर्ण कदम है। जैसे-जैसे देश ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी उन्नति की ओर बढ़ रहा है, यह विधेयक भारत की परमाणु ऊर्जा और व्यापक ऊर्जा परिदृश्य के विकास को गति देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। मुझे विश्वास है कि यह परमाणु क्षेत्र में सभी के लिए एक रोमांचक अध्याय की शुरुआत है। आइए हम अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों से प्रेरणा लें, इस गति का लाभ उठाएं और अधिक गतिशील और विविध रूप से योगदान देने के लिए तैयार हो जाएं।
पिछले एक वर्ष में, हमारी घटक इकाइयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सहायता प्राप्त संस्थानों ने नवोन्मेषी अनुसंधान एवं विकास को आगे बढ़ाने, हमारे परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को उन्नत करने और विभिन्न सहायक प्रौद्योगिकियों को लागू करने के माध्यम से हमारे जनादेश में उल्लेखनीय योगदान दिया है, जिसके बारे में विस्तार से बताना मुझे प्रसन्नता होगी।
1.AMD ने सतत अन्वेषण प्रयासों के माध्यम से आंध्र प्रदेश, झारखंड और राजस्थान में स्वस्थाने (in-situ) यूरेनियम ऑक्साइड (U3O8) के संसाधन में वृद्धि की है। इसके साथ ही देश का कुल स्वस्थाने (in-situ) यूरेनियम U3O8 संसाधन लगभग 4,39,800 टन हो गया है।.
2.इसी अवधि के दौरान राजस्थान के कठोर चट्टानी भू-भाग में कुल रेयर अर्थ ऑक्साइड (REO) संसाधनों में स्वस्थाने (In-situ) 57,343 टन की वृद्धि की गई और देश का कुल रेयर अर्थ ऑक्साइड संसाधन स्वस्थाने (In-situ) लगभग 1.29 मिलियन टन हो गया है।
3.भारी पानी बोर्ड हमारे PHWRs की वार्षिक आपूर्ति की आवश्यकता को पूरा करने के लिए नाभिकीय-ग्रेड भारी पानी का उत्पादन कर रहा है। इस वर्ष भारी पानी बोर्ड ने RAPS-7 के लिए भारी पानी के शेष भंडार आपूर्ति को पूरा किया है और RAPS-8 के लिए प्रारंभिक तथा परीक्षण भंडार के लिए भी आपूर्ति प्रारंभ कर दिया है।
4.नाभिकीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में, तीसरे 700 मेगावाट PHWR, RAPP यूनिट-7 ने 15 अप्रैल, 2025 से वाणिज्यिक प्रचालन प्रारंभ कर दिया है।.
5.NPCIL के प्रचालनरत रिएक्टरों के बेड़ों ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 86.61% के प्लांट लोड फैक्टर के साथ 56,681 MU का अब तक का उच्चतम विद्युत उत्पादन अर्जित किया है साथ ही वर्ष 2025 के दौरान लगभग 54 बिलियन यूनिट विद्युत का उत्पादन सुनिश्चित किया गया ।
6.NAPS-2, TAPS-3, RAPS-6, KKNPPP-2 और KGS-4 एक वर्ष से अधिक समय से निरंतर प्रचालनरत हैं जो भारतीय नाभिकीय ऊर्जा रिएक्टरों द्वारा लंबे समय तक निरंतर प्रचालन का रिकॉर्ड स्थापित करते हैं। इसके साथ ही हमारे रिएक्टरों ने 54 बार एक वर्ष से अधिक निरंतर प्रचालन अर्जित किया और अपने प्रचालन के प्रारंभ से लेकर समेकित 655 रिएक्टर-वर्षों का संरक्षित प्रचालन पूरा किया है।
7.विश्व के सबसे पुराने प्रचालनरत नाभिकीय रिएक्टर TAPS-1 ने व्यापक नवीनीकरण कार्यों के सफल समापन के बाद 30 दिसंबर 2025 को क्रिटिकैलिटी प्राप्त कर ली है।.
8.माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने माही बांसवाड़ा राजस्थान नाभिकीय ऊर्जा परियोजना 1 से 4 की आधारशिला 25 सितंबर 2025 को रखी है जिसका कार्यान्वयन ASHVINI (NPCIL और NTPC का संयुक्त उद्यम) द्वारा किया जाएगा।
9.BHAVINI में, PFBR के सभी निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं और समन्वित कमीशनिंग प्रक्रिया प्रगति पर है। प्रथम क्रिटिकैलिटी के लिए ईंधन भरण प्रक्रिया जारी है।
10.BARC में, अप्सरा-अपग्रेडेड (Apsara-U) के लिए स्वदेशी रूप से विकसित सिलिसाइड डिस्पर्शन ईंधन ने सुदृढ़ प्रदर्शन किया, जिसमें औसतन 55,000 MWD/Te का बर्न-अप प्राप्त हुआ।
कृषि, खाद्य प्रसंस्करण एवं संरक्षण, जल एवं शहरी अपशिष्ट प्रबंधन आदि क्षेत्रों में विकिरण प्रौद्योगिकी के सामाजिक अनुप्रयोग में विभाग के योगदान की बात करें तो इसे न केवल निजी क्षेत्र के औद्योगिक और ग्रामीण लाइसेंसधारियों से बल्कि सरकार के अन्य विभागों/मंत्रालयों से भी सहयोग मिल रहा है।
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के भाग के रूप में भारत सरकार द्वारा अभिकल्पित एकीकृत कोल्ड चेन एवं मूल्यवर्धन अवसंरचना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा DAE प्रौद्योगिकी आधारित बहु-उत्पाद खाद्य विकिरण इकाइयों की स्थापना करने पर विचार किया गया है। ऐसी सुविधाएं स्थापित करने के लिए BRIT (DAE) के साथ अब तक सत्रह (17) समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
निजी/राज्य सरकार के क्षेत्रों में गामा विकिरण संसाधन संयंत्र स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं और इस अवधि के दौरान ऐसे 5 संयंत्र चालू किए गए हैं। आज भारत में कुल 42 संयंत्र प्रचालनरत हैं जो स्वास्थ्य सेवा उत्पादों के निर्जर्मीकरण और कृषि उत्पादों के स्वच्छीकरण (हाइजिनाईजेशन) के लिए घरेलू/निर्यात आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। BRIT/DAE इन संयंत्रों को Co-60 स्रोत की आपूर्ति करते हुए और संयंत्र प्रचालन प्राचल स्थापित कर सहयोग प्रदान करता है।
DAE के प्रमुख फ्लैगशिप कार्यक्रम की पहल में रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के स्वदेशी उत्पादन एवं आपूर्ति तथा देशभर में मानकीकृत कैंसर उपचार उपलब्ध कराने के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में DAE की इकाइयों का योगदान निरंतर जारी है। स्वस्थ राष्ट्र निर्माण की दिशा में उन्मुख इस मिशन में TMC, BRIT, VECC और BARC लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं और वर्ष-दर-वर्ष अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। वर्ष 2025 में, परमाणु ऊर्जा विभाग की इकाइयों ने सामूहिक रूप से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में निम्नलिखित माध्यमों से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
1.बिहार के मुजफ्फरपुर में TMC के होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (HBCH&RC), जो 150 बिस्तरों वाला एक व्यापक कैंसर देखभाल केंद्र है, इसका उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 22 अगस्त 2025 को किया। यह अस्पताल पूर्वी भारत के उस क्षेत्र में व्यापक, उन्नत और किफायती कैंसर देखभाल प्रदान कर रहा है जहां पहले कैंसर देखभाल की सुविधा नहीं थी और इस प्रकार पूर्वी भारत में कैंसर देखभाल तक समान पहुंच को समृद्ध बना रहा है।.
2.BARC ने मधुमेह के कारण होने वाले पैरों के अल्सर के उपचार के लिए नाइट्रिक ऑक्साइड उत्सर्जित करने वाले पेटेंटकृत घाव ड्रेसिंग ColoNox को लॉन्च किया है।
3.BRIT ने देश में पहली बार उच्च विशिष्ट गतिविधि वाली 131I-mIBG चिकित्सीय डोज़ तैयार किया है जिसे न्यूरोब्लास्टोमा (Neuroblastoma) से पीड़ित एक किशोर के सफल उपचार के लिए उपयोग किया गया।
4.IPR ने ICMR के सहयोग से बहुत ही किफायती दर पर छाती के एक्स-रे का उपयोग करके PULMONARY TB और अन्य फेफड़ों की बीमारियों की स्वचालित स्क्रीनिंग/पता लगाने के लिए आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डीप लर्निंग सॉफ्टवेयर (DeepCXR) विकसित और सत्यापित किया है। इस डीप लर्निंग सॉफ्टवेयर को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा भारत के राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के लिए AI स्क्रीनिंग टूल के रूप में भी संस्तुत किया गया है।
5.RRCAT स्थित इलेक्ट्रॉन बीम सुविधा (ARPF) व्यावसायिक चिकित्सा उपकरणों के लिए ई-बीम निर्जर्मीकरण सेवाएं प्रदान कर रहा है इसने 2023 से 1.98 करोड़ चिकित्सा उपकरणों का निर्जर्मीकरण किया है। पिछले वर्ष 1 करोड़ से अधिक उपकरणों का निर्जर्मीकरण किया गया है। .
6.VECC ने कोलकाता स्थित 30 MeV मेडिकल साइक्लोट्रॉन सिस्टम के माध्यम से BRIT द्वारा विभिन्न PET और SPECT रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के व्यावसायिक उत्पादन और आपूर्ति को सुगम बनाया है। इन रेडियोफार्मास्यूटिकल्स की आपूर्ति कोलकाता और उसके आसपास के विभिन्न अस्पतालों/नाभिकीय चिकित्सा केंद्रों को गई जिनका उपयोग कैंसर रोगियों के निदान के लिए किया जाता है ।
अब, मैं विज्ञान और उन्नत प्रौद्योगिकियों में मौलिक और निदेशित अनुसंधान में हमारी प्राथमिकता पर प्रकाश डालना चाहूंगा, जिसका हमारे राष्ट्र की प्रगति और विकास की दिशा में प्रमुख आत्मनिर्भर योगदान है।
1.BARC ने FBTR साइट पर हाइड्रोजन उत्पादन हेतु Cu-Cl थर्मोकेमिकल साइकिल एक पायलट-स्तरीय सुविधा स्थापित की है ताकि FBTR के सेकेण्डरी लूप से मोल्टेन सोडियम के साथ समन्वित Cu-Cl सुविधा प्रचालन का प्रदर्शन किया जा सके।
2.BARC ने INRP कल्पाक्कम के लिए अपनी तरह की पहली अल्ट्रासोनिक आधारित अमोनियम नाइट्रेट सांद्रता निर्धारण प्रणाली, PHWR ईंधन एंड कैप वेल्ड के धातुकर्म निरीक्षण के लिए छवि विश्लेषण आधारित स्वचालित प्रणाली और भारी जल के बोरॉन समस्थानिक (Isotopic) विश्लेषण के लिए एक नए लघु थर्मल आयनीकरण मास स्पेक्ट्रोमीटर जैसी स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का विकास और सफल उपयोग किया है।
3.विभाग द्वारा थोरियम उपयोग की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के तहत, BARC में स्थित क्रिटिकल फैसिलिटी का उपयोग विभिन्न कोर स्थानों पर मोल्टन सॉल्ट रिएक्टर ईंधन लवण के साथ विशेष क्रिटिकैलिटी प्रयोगों के लिए किया गया।.
4.ECIL ने KKNPP-3 और 4 को दुर्घटना निगरानी प्रणाली, N16 और घास-आधारित गामा निगरानी प्रणाली और निष्क्रिय रेडियोधर्मी गैस निगरानी प्रणाली की आपूर्ति की, RAPP-8 में न्यूट्रॉनिक एम्पलीफायर प्रणाली को चालू किया और नाभिकीय ऊर्जा संयंत्रों में रेडियोधर्मी या विखंडनीय पदार्थों की अनाधिकृत आवाजाही को रोकने के लिए एक पैदल यात्री निगरानी प्रणाली विकसित की है।.
5.AMD और NCCCM, BARC द्वारा संयुक्त रूप से विकसित फेरोकार्बोनेटाइट की स्वदेशी रूप से विकसित प्रमाणित संदर्भ सामग्री (CRM) को औपचारिक रूप से जारी किया गया।.
6.आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, आईपीआर में लगभग 90% स्वदेशी सामग्री से निर्मित 2000 लीटर प्रति दिन क्षमता वाला हीलियम रेफ्रिजरेटर-सह-लिक्विफायर संयंत्र विकसित किया गया और इसका सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।.
7.आईपीआर ने भारत के पहले स्वदेशी रूप से अभिकल्पित एवं विकसित स्फेरिकल टोकामाक (स्माल-स्केल स्फेरिकल टोकामाक – एसएसएसटी) में प्रथम प्लाज्मा का प्रदर्शन किया है। इस टोकामाक का निर्माण पूरी तरह से स्थानीय उद्योगों के योगदान से किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने की दिशा में ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को दर्शाता है।.
8.RRCAT ने इनवर्टेड मैग्नेट्रॉन सिद्धांत पर आधारित अल्ट्रा-हाई वैक्यूम (UHV) गॉज़ प्रणाली, “निर्वातमापी-01” को सफलतापूर्वक विकसित किया और देश में पहली बार इसके विश्वसनीय प्रचालन का परीक्षण किया है। यह स्वदेशी विकास भविष्य की परियोजनाओं के लिए बड़ी संख्या में अपेक्षित यूएचवी गॉज के आयात विकल्प के रूप में कार्य करेगा, जिससे आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।.
9.RRCAT ने दिसंबर 2025 में एनएफसी, हैदराबाद में PHWR ईंधन छड़, गार्टर स्प्रिंग और आरएमए घटकों के लिए पांच मशीन विजन आधारित निरीक्षण और मेट्रोलॉजी प्रणाली का विकास, परीक्षण और स्थापना की गई है, जिससे मानव संसाधन में पर्याप्त बचत होगी और मैन-रेम में कमी आएगी।.
10.NFC ने उच्च बर्न-अप अनुप्रयोगों के लिए 1000 पीपीएम से कम ऑक्सीजन वाले एक नए ज़िरकोनियम-आधारित उन्नत Quaternary alloy (Zr-Nb-Sn-Fe) ट्यूबों का सफलतापूर्वक विकास किया है। इन्हें Zr1%Nb के विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया गया है। इनमें कम किरणन वृद्धि गुणधर्म होने के कारण ईंधन के निष्पादन में वृद्धि होती है।.
11.NFC ने पहली बार, न्यूनतम संभव 3 महीने में स्टीम जनरेटर ट्यूबिंग का एक पूरा सेट निर्मित कर इसे मेसर्स एलएंडटी लिमिटेड को सौंप दिया है।.
12.NFC ने नियंत्रित क्लोरीनीकरण दर का उपयोग करते हुए ZrCl4 के चयनात्मक संघनन के लिए एक अभूतपूर्व प्रक्रिया विकसित की है। इसके साथ-साथ अपचयन और आसवन में प्रक्रियायों में प्रक्रिया-प्राचलों का अनुकूलन और अपचयन प्रचालनों के दौरान स्पंज की ग्रेडिंग की गई । इस प्रक्रिया ने Zr-Nb टर्निंग्स के पुनर्चक्रण का मार्ग भी प्रशस्त किया है।.
13.NFC ने ZrH2 से भरे 225 ज़िरकोलोय माडरेटर ट्यूबों का उत्पादन किया है और BARC को सॉलिड मॉडरेटर के रूप में उनकी आपूर्ति की है जो एडवांस्ड मॉड्यूलर रिएक्टरों में उपयोग की क्षमता वाला है।.
14.VECC में, भारत में पहली बार, K500 सुपरकंडक्टिंग साइक्लोट्रॉन (एससीसी) ने क्रिप्टॉन की किरण को 610 MeV ऊर्जा पर त्वरित (accelerate) किया और नाभिकीय भौतिकी प्रयोगों के लिए उपयोगकर्ताओं को सफलतापूर्वक आपूर्ति किया।
15.BRIT ने कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग (CME), पुणे को स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया Co-60 आधारित विकिरण एक्सपोजर उपकरण, COCAM-A की सफलतापूर्वक आपूर्ति की और NORDION (कनाडा) Inc. को Co-60 की 1MCi विकिरण स्रोत निर्यात किया है।.
16.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (TIFR) के वैज्ञानिकों ने बाइनरी ब्लैक होल से प्रणालियों से उत्पन्न प्रबल रूप से लेंसित गुरुत्वीय तरंगों का उपयोग करते हुए डार्क मैटर की प्रकृति की जांच से संबंधित अध्ययन किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने Ωccc बैरियन के अब तक के सबसे सटीक द्रव्यमान का अनुमान लगाया है, जो पूरी तरह से चार्म वैलेंस क्वार्क्स से बना एक विरल कण है और प्रोटॉन से लगभग पांच गुना भारी है। यह वर्तमान और भविष्य के प्रयोगों के लिए सबसे विश्वसनीय सैद्धांतिक संदर्भ प्रदान करता है।
17.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (NCRA-TIFR) के राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केंद्र में भारतीय भौतिकविदों ने नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) का उपयोग करते हुए कभी न देखी गई जो विशाल, सुंदर ढंग से संरचित ब्रह्मांडीय पिनव्हील सबसे दूरस्थ सर्पिल आकाशगंगाओं में से एक की खोज की है – जो तब मौजूद थी जब ब्रह्मांड केवल 1.5 अरब वर्ष पुराना था, इसे अलकनंदा नाम दिया गया है।
18.IMSc सैद्धांतिक भौतिकी, गणित, सैद्धांतिक कंप्यूटर विज्ञान और कम्प्यूटेशनल जीवविज्ञान के क्षेत्रों में अपना योगदान दे रहा है और इसने पिछले वर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में 232 शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।.
19.ऊर्जा पदार्थों के क्षेत्र में, हरीश-चंद्र अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने उच्च दक्षता और स्थिर सौर सेल प्रौद्योगिकियों तथा उच्च निष्पत्ति वाले हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उभरती निम्न-आयामी नैनोसंरचनाओं का सफलतापूर्वक पूर्वानुमान लगाया और प्रयोगात्मक रूप से इसकी पुष्टि की ।
अब, मैं उन सम्मिलित प्रयासों पर बात करना चाहूंगा, जिनके माध्यम से परमाणु ऊर्जा विभाग मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण की दिशा में कार्य कर रहा है और ये हमारी सभी गतिविधियों को जोड़ने वाले सामान्य सूत्र हैं।.
1.दूसरा डीएई कान्क्लेव हाल ही में मुंबई स्थित TIFR में आयोजित किया गया। डीएई में इस तरह के कान्क्लेव विभाग की उपलब्धियों का जश्न मनाने और भविष्य की योजनाओं पर विचार-विमर्श करने के लिए शुरू किए गए हैं। इस कान्क्लेव के दौरान, डीएई प्रौद्योगिकियों, युवा शोधकर्ताओं, उद्योगों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के कार्यों का प्रदर्शन भी किया गया।
2.HBNI ने अनुसंधान संस्थान श्रेणी में 7वां स्थान, विश्वविद्यालय श्रेणी में 12वां स्थान और NIRF रैंकिंग 2025 में समग्र श्रेणी में 20वां स्थान प्राप्त किया।
3.होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (HBCH एवं RC), न्यू चंडीगढ़, पंजाब, HBNI का तीसरा ऑफ-कैंपस केंद्र बन गया, जिससे HBNI के अंतर्गत संस्थानों की कुल संख्या बढ़कर 13 हो गई।
4.जी पी बिरला पुरातत्व खगोल विज्ञान एवं वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान (GPBAASRI) ने भारत की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता के तहत हैदराबाद स्थित बी.एम. बिरला विज्ञान केंद्र में “आत्मनिर्भर भारत – NFC गैलरी” का सृजन किया, जिसका उद्घाटन अक्टूबर 2025 में किया गया। यह गैलरी NFC में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रयासों को प्रदर्शित करती है। विभाग संपूर्ण नाभिकीय ईंधन चक्र में भारत की स्वतंत्रता स्थापित करने में उल्लेखनीय प्रगति और उपलब्धियों की ओर अग्रसर है।
5.भारतीय छात्रों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। भारत ने गणित, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी के विभिन्न ओलंपियाड में कुल 14 स्वर्ण, 9 रजत और 1 कांस्य पदक हासिल किए हैं। इंटरनेशनल ओलंपियाड ऑन एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स – 2025 का आयोजन होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन द्वारा 11 से 21 अगस्त 2025 तक मुंबई, भारत में किया गया।
जहाँ हम अपने अधिदेशित क्षेत्रों पर अपना ध्यान सुदृढ़ करना जारी रखे हुए हैं, वहीं DCSEM, DPS और GSO जैसे हमारे सेवा संगठनों ने विभाग के बुनियादी ढांचे को सहयोग, सुविधा और संवर्धन प्रदान करना जारी रखा है। इस वर्ष हासिल की गई ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक DPS की कागज रहित होने की पहल थी। यह सामग्री प्रबंधन प्रणाली (MMS) के माध्यम से संपूर्ण खरीद प्रक्रिया के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके अर्जित किया गया। एकीकृत आईटी प्लेटफॉर्म के लिए MMS को अन्य सभी बाहरी इकाइयों तक विस्तारित किया गया है। DCSEM ने डीएई इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज (DIAS) के लिए प्रमुख उन्नयन और विकास कार्य पूरे कर लिए हैं।.
जैसा कि स्पष्ट है DAE के सामूहिक प्रयासों से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित हुई हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि DAE परिवार को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए गए हैं। इन उपलब्धियों के लिए मैं अपनी प्रसन्नता आपके साथ साझा करना चाहता हूँ ।
1.टीम AMD ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), खान मंत्रालय (MoM) द्वारा आयोजित ‘खनिज अन्वेषण हैकाथॉन’ में ‘नवीन खनिज खोज तकनीकों’ पर प्रथम पुरस्कार जीता।
2.भारत की माननीया राष्ट्रपति द्वारा संस्थागत उत्कृष्टता के लिए ECIL को ELCINA 6वां DEFENNOVATION सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट पुरस्कार- 2025 और स्कोप एमिनेंस पुरस्कार (2022-23) प्राप्त हुआ। DRDO इंडस्ट्री सिनर्जी मीट-2025 में सर्वश्रेष्ठ उद्योग पुरस्कार 2025 (स्वर्ण, श्रेणी-II) और इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) द्वारा IEI औद्योगिक उत्कृष्टता पुरस्कार – 2025 से सम्मानित किया गया है। ECIL के उत्कृष्ट वैज्ञानिक और निदेशक (तकनीकी) डॉ. अनेश कुमार शर्मा को भारत के सामरिक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ELCINA पुरस्कार प्राप्त हुआ।
3.CEBS के निदेशक डॉ. यूसुफ मोहम्मद शेख और TIFR के प्रोफेसर एम. जे. महान को विज्ञान श्री पुरस्कार, NCBS-TIFR, बेंगलुरु की प्रोफेसर दीपा अगाशे और TIFR, मुंबई के प्रोफेसर सब्यसाची मुखर्जी को विज्ञान युवा पुरस्कार से भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया।
4.CEBS के शोधार्थी श्री राहुल एम. मिश्रा ने 20वें आविष्कार अंतर-महाविद्यालय/संस्थान/विभागीय अनुसंधान सम्मेलन में दूसरा स्थान प्राप्त किया।.
5.IMSc के संकाय सदस्य सनोली गुण और अमृतांशु प्रसाद को राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (NASI) का फेलो चुना गया, मीना महाजन को INSA का फेलो और सी राम्या को IASc का एसोसिएट चुना गया।.
6.HRI में, प्रोफेसर अदिति सेन डे को राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत (NASI) का फेलो चुना गया और डॉ. सुदीप चक्रवर्ती को SMC कांस्य पदक-2025 से सम्मानित किया गया।.
7.श्रीमती सोनिया कपूर, प्रधानाध्यापिका, AECS-2, मुंबई को भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा शिक्षक दिवस, 2025 के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया गया।
While our scientists, जहां हमारे वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीविद् और इंजीनियर अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने के लिए कटिबद्ध हैं, वहीं AEES स्कूलों में पढ़ने वाले हमारे बच्चे भी हमें गौरवान्वित कर रहे हैं।
1.NCERT द्वारा आयोजित 52वें राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी 2025 में भाग लेने के लिए AEES विद्यालयों से 18 विज्ञान प्रदर्शनियों का चयन किया गया।.
2.रावतभाटा स्थित AECS-2 के कक्षा 10 के छात्र मास्टर आरव गोदरा को DST द्वारा INSPIRE – MANAK पुरस्कार 2024-25 से सम्मानित किया गया और मुंबई स्थित AECS-4 की कक्षा 8 की छात्रा कुमारी आध्या पॉल ने नॉलेज एंड अवेयरनेस मैपिंग प्लेटफॉर्म KAMP में राज्य स्तरीय प्रथम स्थान प्राप्त किया।
3.AECS-1, कल्पाक्कम ने राज्य स्तरीय विद्यार्थी विज्ञान मंथन (VVM) विज्ञान प्रतिभा प्रदर्शनी में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
प्रिय सहयोगियों,
पिछले सात दशकों में, हमने नाभिकीय ऊर्जा के विभिन्न क्षेत्रों में बहुआयामी क्षमताओं का निर्माण किया है। देश के नाभिकीय ऊर्जा परिदृश्य के उत्तरदायी विस्तार को सशक्त बनाने हेतु शांति विधेयक, 2025 के अधिनियमन के साथ अब यह समय आ गया है कि हम अपनी व्यापक, राष्ट्र-केंद्रित गतिविधियों को सुदृढ़ करें तथा उन्हें अधिक केंद्रित और अधिदेशित दिशा में पुनर्गठित करें। हमारे विभाग द्वारा वर्ष 2047 के लिए जारी किया गया विज़न दस्तावेज़, विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को अर्जित करने की दिशा में स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करेगा तथा इस लक्ष्य की पूर्ति में हमारे योगदान को परिभाषित करने हेतु एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा।
मैं आप सभी के सतत प्रयासों के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ और आपसे आग्रह करता हूँ कि इस महान राष्ट्र के नागरिकों तथा हमारे विभाग की उपलब्धियों में सहभागी होने के नाते, हम इस प्रगति को निरंतर समर्थन दें और यह सुनिश्चित करें कि इन क्षमताओं का उपयोग मानवता के हित में पूर्ण उत्तरदायित्व के साथ किया जाए। आइए, हम मिलकर ऐसे भारत का निर्माण करें जो न केवल आत्मनिर्भर हो, बल्कि विश्व के लिए आशा और नवाचार का प्रतीक भी बने। .
अंत में, किंतु कम महत्वपूर्ण नहीं, मैं विशेष रूप से हमारे स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों, सुरक्षा कर्मियों तथा प्रशासनिक, तकनीकी और वैज्ञानिक कर्मचारियों के समर्पण का उल्लेख करते हुए उनके प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करना चाहूँगा जो हमारे सभी कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों की संरक्षा, सुरक्षा और उत्तम स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस प्रकार हम सभी के लिए एक अनुकूल एवं सकारात्मक कार्य – वातावरण का सृजन करते हैं।
अंत में, मैं परमाणु ऊर्जा विभाग के सभी सदस्यों एवं उनके परिवारजनों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।
धन्यवाद। जय हिंद