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    कल्पाक्कम, तमिलनाडु स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने प्रथम क्रिटिकलिटी प्राप्त की

    प्रकाशित तिथि : अप्रैल 7, 2026

    भारत के नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, 500 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने 6 अप्रैल 2026 को रात 08:26 बजे प्रथम क्रिटिकलिटी (नियंत्रित विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया की शुरुआत) सफलतापूर्वक प्राप्त कर ली है। यह दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने और स्वदेशी नाभिकीय प्रौद्योगिकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

    यह क्रिटिकलिटी डॉ. अजित कुमार मोहान्ती, सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) एवं अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी), श्री श्रीकुमार जी. पिल्लै, निदेशक, आईजीकार, श्री अल्लू अनंत, प्रभारी-अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, भाविनी तथा श्री के.वी.सुरेश कुमार, पूर्व अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, भाविनी एवं होमी सेठना चेयर की उपस्थिति में प्राप्त की गई। यह उपलब्धि परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) द्वारा संयंत्र प्रणालियों की सुरक्षा की कठोर समीक्षा के बाद सभी आवश्यक शर्तें पूरी होने पर स्वीकृति जारी किए जाने के पश्चात अर्जित की गई।

    पीएफबीआर का प्रौद्योगिकी विकास एवं डिजाइन परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसंधान एवं विकास केंद्र, इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीकार) द्वारा पूर्णत: स्वदेशी रूप से किया गया है तथा इसका निर्माण एवं कमीशनिंग भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) द्वारा किया गया, जो परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।

    फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत की दीर्घकालिक नाभ‍िकीय सामरिक नीति का एक महत्वपूर्ण आधार है। पारंपरिक तापीय रिएक्टरों के विपरीत, पीएफबीआर में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (मॉक्स) ईंधन का उपयोग किया जाता है। पीएफबीआर के कोर के चारों ओर यूरेनियम-238 की आवरण परत होती है। द्रुत न्यूट्रॉन उर्वर यूरेनियम-238 को विखंडनीय प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित करते हैं, जिससे रिएक्टर जितना ईंधन उपयोग करता है उससे अधिक ईंधन उत्पन्न करता है। इस रिएक्टर को भविष्य में आवरण (ब्लैंकेट) में थोरियम-232 उपयोग करने के लिए भी डिजाइन किया गया है। रूपांतरण प्रक्रिया के माध्यम से थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में परिवर्ति‍त किया जाएगा, जो भारत के नाभ‍िकीय कार्यक्रम के तीसरे चरण के लिए ईंधन प्रदान करेगा।

    यह विशिष्ट क्षमता नाभिकीय ईंधन संसाधनों के उपयोग को अत्यधिक बढ़ाती है और देश को अपने सीमित यूरेनियम भंडार से कहीं अधिक ऊर्जा प्राप्त करने में सक्षम बनाती है, साथ ही भविष्य में थोरियम के बड़े पैमाने पर उपयोग की तैयारी भी करती है।

    प्रथम क्रिटिकलिटी की इस उपलब्धि के साथ भारत अपने त्रि-चरणीय नाभ‍िकीय ऊर्जा कार्यक्रम की पूर्ण क्षमता को साकार करने के और निकट पहुंच गया है। फास्ट ब्रीडर प्रौद्योगिकी वर्तमान दाबित भारी पानी रिएक्टरों और भविष्य के थोरियम आधारित रिएक्टरों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करती है, जिससे देश के प्रचुर थोरियम संसाधनों का उपयोग दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन हेतु संभव होगा।

    यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी डिजाइन, इंजीनियरिंग और विनिर्माण तंत्र की सुदृढ़ता को प्रदर्शित करती है। इस रिएक्टर में उन्नत सुरक्षा प्रणालियाँ, उच्च तापमान द्रव सोडियम शीतलक प्रौद्योगिकी तथा क्लोज्ड फ्यूल साइकिल दृष्टिकोण शामिल है जो नाभिकीय सामग्रियों के पुनर्चक्रण को सक्षम बनाता है जिससे स्थिरता में सुधार होता है और अपशिष्ट में कमी आती है।

    यह परियोजना उन अनेक वैज्ञानिकों, अभियंताओं, तकनीशियनों और औद्योगिक साझेदारों के समर्पण को भी दर्शाती है जिन्होंने मुख्यतः स्वदेशी प्रौद्योगिकी और घटकों का उपयोग करते हुए इस रिएक्टर के डिजाइन, निर्माण और स्थापना में योगदान दिया है। उनके प्रयास उन्नत नाभिकीय इंजीनियरिंग में देश की बढ़ती क्षमता को रेखांकित करते हैं और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अनुरूप प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हैं।

    ऊर्जा उत्पादन के अलावा, फास्ट ब्रीडर कार्यक्रम नाभिकीय ईंधन चक्र प्रौद्योगिकियों, उन्नत पदार्थ विज्ञान, रिएक्टर भौतिकी और बड़े पैमाने की इंजीनियरिंग में सामरिक क्षमताओं को भी सुदृढ़ करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विकसित ज्ञान और अवसंरचना भविष्य के रिएक्टर डिजाइनों और अगली पीढ़ी की नाभिकीय प्रौद्योगिकियों का समर्थन करेंगे।

    जैसे-जैसे भारत अपने स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का विस्तार कर रहा है, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विश्वसनीय, निम्न-कार्बन, बेस-लोड विद्युत को उच्च तापीय दक्षता के साथ आपूर्ति कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। प्रथम क्रिटिकलिटी की प्राप्‍ति केवल एक प्रौद्योगिकीय उपलब्‍धि ही नहीं, बल्कि विकसित भारत के लिए एक सतत और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम भी है।


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