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    टीआईएफआर में आयोजित द्वितीय डीएई सम्मेलन में भारत की नाभिकीय विज्ञान और अग्रणी प्रौद्योगिकियों में हुई प्रगति का प्रदर्शन

    प्रकाशित तिथि : जनवरी 27, 2026

    मुंबई स्थित टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (टीआईएफआर) के मुख्य परिसर में दिनांक 14 से 18 जनवरी, 2026 तक द्वितीय डीएई सम्मेलन (DAEC 2026) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में परमाणु ऊर्जा विभाग की इकाइयों, संस्थानों और अनुदान प्राप्त संस्थानों से वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीविद, शोधकर्ता और विद्वान मिलाकर लगभग 1,000 प्रतिनिधि एकत्रित हुए। इसने ज्ञान के आदान-प्रदान, सहयोग और संवाद के लिए एक सुव्यवस्थित मंच प्रदान किया।

    केंद्रीय विषयवस्तु

    “नाभिकीय क्षितिज के माध्यम से संधारणीय भविष्य के लिए नवोन्मेषी समाधान तैयार करना” विषय पर आधारित डीएई 2026 सम्मेलन में भारत के दीर्घकालिक संधारणीय विकास लक्ष्यों के प्रमुख प्रवर्तक के रूप में नाभिकीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। चर्चा के दौरान नाभिकीय प्रौद्योगिकियों के विद्युत और गैर-विद्युत अनुप्रयोगों के पूर्ण विस्तार में नवाचार के माध्यम से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को समाधान करने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग के एकीकृत दृष्टिकोण पर बल दिया गया, साथ ही स्वदेशी मौलिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता और क्षमता निर्माण के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

    ज्ञान का आदान-प्रदान और सहयोग

    सुनियोजित कार्यक्रम और उसके क्रियान्वयन के माध्यम से डीएई 2026 सम्मेलन ने परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसंधान एवं विकास, औद्योगिक और शैक्षणिक संगठनों के अनुभवी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के साथ-साथ अग्रणी युवा योगदानकर्ताओं को एकीकृत संवादात्मक मंच पर एकजुट किया। इस प्रारूप ने विभिन्न विषयों में संवाद, सहयोग और विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया।

    प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए टीआईएफआर के निदेशक प्रोफेसर जयराम एन. चेंगलुर ने अगली पीढ़ी की नाभिकीय और गैर-नाभिकीय प्रौद्योगिकियों को सक्षम बनाने में अनुसंधान और विकास के लिए अंतःविषय दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया।

    विकसित भारत के लिए रोडमैप

    2024 में टीआईएफआर में आयोजित परमाणु ऊर्जा विभाग महा चिंतन शिविर, जिसने विभाग के अमृत काल विज़न 2047 को प्रारंभ किया और एनआईएसईआर (NISER), भुवनेश्वर द्वारा आयोजित प्रथम डीएई सम्मेलन (2024) के आधार पर डीएई 2026 सम्मेलन ने भारत के दीर्घकालिक वैज्ञानिक और तकनीकी रोडमैप पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ाया। चर्चाओं में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का समर्थन कैसे कर सकते हैं।

    अपने उद्घाटन संबोधन में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) के निदेशक श्री विवेक भासीन ने नाभिकीय विज्ञान और इंजीनियरिंग में भारत के सामर्थ्य और उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकियों तथा सीमांत अनुसंधान पर केंद्रित एक रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत किया, जिन्हें नाभिकीय ऊर्जा मिशन के समर्थन हेतु आधारभूत स्तंभ के रूप में स्थापित किया गया।

    मौलिक विज्ञान से लेकर सामाजिक प्रौद्योगिकियों तक

    डीएई 2026 सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा और अगली पीढ़ी के नाभिकीय रिएक्टर, आइसोटोप उत्पादन, क्वांटम प्रौद्योगिकियां, उन्नत सामग्री, संलयन अनुसंधान, लेजर-चालित कण त्वरक और नाभिकीय विज्ञान के स्वास्थ्य संबंधी अनुप्रयोगों सहित विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें गुरुत्वाकर्षण-तरंग खगोल विज्ञान, डार्क मैटर अनुसंधान, मल्टी-मैसेंजर खगोल विज्ञान और पार्टिकल कोलाइडर-आधारित अन्वेषण जैसे मेगा-विज्ञान क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भागीदारी के साथ-साथ पारिस्थितिकी अनुसंधान और विज्ञान शिक्षा पहलों में महत्वपूर्ण योगदान पर भी प्रकाश डाला गया, जो मौलिक और अनुप्रयुक्त अनुसंधान के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग के एकीकृत दृष्टिकोण को दर्शाता है।

    प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, परमाणु ऊर्जा आयोग के सदस्य डॉ. अनिल काकोडकर ने इस बात पर जोर दिया कि दीर्घकालिक प्रौद्योगिकीय नेतृत्व को बनाए रखने के लिए मौलिक विज्ञान, मेगा-साइंस सुविधाओं और मानव संसाधन विकास में सतत निवेश आवश्यक है।

    नवाचार, सहयोग और सामाजिक प्रभाव

    डीएई 2026 सम्मेलन ने वैज्ञानिक उत्कृष्टता को मूर्त सामाजिक परिणामों में बदलने के लिए नवाचार, सहयोग और व्यापक पहुंच की भूमिका पर जोर दिया। चर्चाओं में वैज्ञानिक प्रगति के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए ज्ञान सृजकों, प्रौद्योगिकी विकासकर्ताओं, उद्योग, शिक्षाविदों और अंतिम उपयोगकर्ताओं के बीच घनिष्ठ सहभागिता के महत्व को उजागर किया गया।

    श्रोताओं को संबोधित करते हुए परमाणु ऊर्जा आयोग के सदस्य डॉ. रवि भूषण ग्रोवर ने इस बात पर जोर दिया कि नाभिकीय विज्ञान और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में प्रगति के माध्यम से सामाजिक जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके और समावेशी विकास को बढ़ावा दिया जा सके। इसके लिए मजबूत संस्थागत सहयोग और उद्देश्यपूर्ण जनसंपर्क महत्वपूर्ण हैं।

    प्रतिभागियों के व्यापक वर्ग को शामिल करना

    इस सम्मेलन में हाइड्रोजन उत्पादन और भंडारण प्रौद्योगिकियों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पर पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं जिनमें भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, डिजिटल रूपांतरण और विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकियों से संबंधित उभरते समाधानों पर ध्यान केंद्रित किया गया। डीएई 2026 सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण प्रदर्शनी और पोस्टर सत्र था, जिसमें प्रौद्योगिकियों के लाइव प्रदर्शन, लघु मॉडल और परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रमुख प्रतिष्ठानों की व्याख्याएँ तथा क्षेत्र विशेषज्ञों द्वारा संचालित शोध पोस्टर प्रस्तुतियाँ शामिल थीं, जिन्होंने उन्नत विज्ञान और प्रौद्योगिकी को दर्शकों के करीब किया। प्रदर्शित सामग्री और पोस्टर ने छात्रों, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों सभी की रुचि जगाई। नवीन समाधानों ने परमाणु ऊर्जा विभाग प्रौद्योगिकियों के सामाजिक और औद्योगिक प्रभाव को उजागर किया जिससे आत्मनिर्भर भारत को सशक्त बनाने में प्रौद्योगिकी की भूमिका को बल मिला।

    सीमाओं से परे सीखना

    प्रतिनिधियों को निदेशित कला और उद्यान भ्रमण, विज्ञान-आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और टीआईएफआर की अनुसंधान प्रयोगशालाओं के दौरे का अवसर प्रदान किया गया जिससे उन्हें टीआईएफआर की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत से गहराई से जुड़ने का मौका मिला। इन अनुभवों को औपचारिक सत्रों से परे सार्थक शिक्षण अवसरों के रूप में सराहा गया जिससे अनौपचारिक संवाद और संस्थागत जुड़ाव को बढ़ावा मिला। स्कूली छात्रों के साथ संवाद सहित आउटरीच गतिविधियों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज के प्रति परमाणु ऊर्जा विभाग के समग्र दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित किया।

    समन्वित राष्ट्रीय वैज्ञानिक मिशन की ओर

    डीएई 2026 सम्मेलन के दौरान विभिन्न मंचों पर बोलते हुए परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहान्ती ने नाभिकीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और स्थायित्व के क्षेत्र में भारत की दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए समन्वित वैज्ञानिक प्रयासों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास और उद्योग में उभरते रुझानों से अवगत कराते हुए छात्रों, युवा शोधकर्ताओं और पेशेवरों को निरंतर रूप से शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

    परमाणु ऊर्जा विभाग के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दर्शाते हुए डीएई 2026 सम्मेलन ने विभाग की अपनी इकाइयों, संस्थानों और अनुदान प्राप्त करने वाले संगठनों को एक साझा राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप एक सामान्य मंच पर एकजुट करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विभिन्न विषयों और संस्थानों में सहयोग को बढ़ावा देकर, परमाणु ऊर्जा विभाग का लक्ष्य भारत के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, नवाचार को गति देना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और विकसित भारत के निर्माण के सामूहिक लक्ष्य का समर्थन करने वाली प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाना है।

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