परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर से मिलने वाली नाभिकीय ऊष्मा का उपयोग कर कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल चक्र आधारित विश्व की पहली हाइड्रोजन उत्पादन सुविधा का उद्घाटन
- एफबीटीआर से मिलने वाली नाभिकीय ऊष्मा का उपयोग कर विश्व की पहली कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल हाइड्रोजन उत्पादन सुविधा
- एफबीटीआर की विशेष क्षमताओं पर आधारित, भारत की एकमात्र प्रचालनरत फास्ट रिएक्टर अनुसंधान सुविधा
- प्रगत रिएक्टर प्रौद्योगिकी और नाभिकीय ऊर्जा के नवोन्मेषी गैर-विद्युत अनुप्रयोग में इंदिरा गांधी परमाणु ऊर्जा केंद्र (आईजीकार) के नेतृत्व का प्रदर्शन
- बीएआरसी की स्वदेशी रूप से विकसित कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल हाइड्रोजन उत्पादन प्रौद्योगिकी के सफल रूपांतरण का प्रदर्शन
- भारत के त्रि-चरणीय नाभिकीय कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए, नाभिकीय ऊर्जा की भूमिका को विद्युत उत्पादन से आगे बढ़ाते हुए स्वच्छ हाइड्रोजन उत्पादन तक ले जाना
भारत के स्वच्छ ऊर्जा और प्रगत नाभिकीय प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में, आज परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा इंदिरा गांधी परमाणु ऊर्जा केंद्र (आईजीकार) स्थित फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर) से मिलने वाली नाभिकीय ऊष्मा का उपयोग कर कॉपर-क्लोरीन (Cu-Cl) थर्मोकेमिकल चक्र आधारित विश्व की पहली हाइड्रोजन उत्पादन सुविधा का उद्घाटन किया गया। इस सुविधा का उद्घाटन डॉ. अजित कुमार मोहान्ती सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग एवं अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) द्वारा किया गया। इस अवसर पर आईजीकार के निदेशक श्री श्रीकुमार जी. पिल्लई भी उपस्थिति थे
यह सुविधा एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक के रूप में स्थापित हुई है, जिसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी), मुंबई द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। यह Cu–Cl थर्मोकेमिकल प्रक्रिया के माध्यम से नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग कर हाइड्रोजन उत्पादन की प्रक्रिया का प्रामाणीकरण करती है। नाभिकीय प्रक्रिया ऊष्मा का हाइड्रोजन उत्पादन के साथ सफल एकीकरण एक अग्रणी प्रौद्योगिकीय उपलब्धि है। यह उन्नत नाभिकीय रिएक्टरों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर कार्बन-मुक्त हाइड्रोजन उत्पादन की आशाजनक मार्ग प्रशस्त करता है।
हाइड्रोजन को व्यापक रूप से भविष्य के लिए एक प्रमुख ऊर्जा वाहक के रूप में माना जाता है और आशा है कि स्वच्छ और संधारणीय ऊर्जा प्रणालियों के वैश्विक परिवर्तन में यह प्रमुख भूमिका निभाएगा। विश्वभर में विकसित की जा रही हाइड्रोजन उत्पादन की विभिन्न प्रौद्योगिकियों में से Cu–Cl थर्मोकेमिकल चक्र को सबसे अपेक्षाकृत न्यून प्रचालन ताप और उच्च ऊष्मागतिकी दक्षता के कारण सर्वाधिक संभावनाशील प्रौद्योगिकियों में से एक माना जाता है। फास्ट रिएक्टरों से मिलने वाली नाभिकीय ऊष्मा का उपयोग करके यह प्रक्रिया जीवाश्म ईंधन की निर्भरता को उल्लेखनीय रूप से कम करती है और पारंपरिक हाइड्रोजन उत्पादन पद्धतियों से जुड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को समाप्त करती है।
इस सुविधा का कमीशनन बीएआरसी और आईजीकार के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है, जिसमें व्यापक अनुसंधान, प्रक्रियात्मक विकास, इंजीनियरिंग डिज़ाइन, उपकरण संविरचन, संस्थापन, परीक्षण और कमीशनन शामिल है। यह संयंत्र से बहुमूल्य प्रचालन अनुभव उपलब्ध कराएगा और इससे Cu–Cl प्रक्रिया को अधिक बेहतर बनाने में सहयोग मिलेगा तथा वाणिज्यिक उपयोग के लिए बड़े पैमाने पर नाभिकीय-आधारित हाइड्रोजन उत्पादन प्रौद्योगिकीयों के भावी अनुसंधान में भी सहायता मिलेगी।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. अजित कुमार मोहान्ती ने कहा, “हाइड्रोजन उत्पादन जैसी उभरती स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी के साथ नाभिकीय ऊर्जा का एकीकरण, संधारणीय ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण मार्ग प्रदान करता है। विश्वसनीय कार्बन-मुक्त विद्युत और उच्च-तापमान प्रक्रिया ऊष्मा उपलब्ध कराने की अपनी विशिष्ट क्षमता के कारण नाभिकीय ऊर्जा बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन उत्पादन करने में अत्यंत उपयुक्त है। साथ ही यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, डीकार्बोनाइज़ेशन लक्ष्यों और दीर्घकालिक संधारणीय विकास के उद्देश्यों में योगदान देती है। मैं बीएआरसी और आईजीकार के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी दलों को हार्दिक बधाई देता हूं, जिनके निरंतर प्रयासों, नवीनीकरण और तकनीकी उत्कृष्टता ने एक उन्नत वैज्ञानिक अवधारणा को प्रचालनीय रूप से कार्यान्वित किया है। यह उपलब्धि प्रगत नाभिकीय प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों में भारत की बढ़ती क्षमताओं का सशक्त प्रमाण है।”
आईजीकार, परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत भारत के प्रमुख नाभिकीय अनुसंधान संस्थानों में से एक वर्ष 1971 में अपनी स्थापना से ही देश के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम में अग्रणी रहा है। इस केंद्र ने फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर) का सफलतापूर्वक अभिकल्पन, निर्माण और प्रचालन का कार्य किया है। इसने चार दशकों से भी अधिक समय से ईंधन, सामग्रियों और सोडियम प्रौद्योगिकी के विकास एवं परीक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया है। एफबीटीआर से प्राप्त जानकारी और विशेषज्ञता ने भारत के फास्ट रिएक्टर कार्यक्रम के प्रौद्योगिकी की नींव रखी है और 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो भारत के त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण का प्रमुख हिस्सा है।
श्री श्रीकुमार जी. पिल्लई, निदेशक, इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने बताया कि, “यह उपलब्धि इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र में फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर कार्यक्रम से मिले चार दशकों से ज़्यादा के प्रचालन अनुभव और प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता पर आधारित है। नाभिकीय प्रक्रिया ऊष्मा के उपयोग से हाइड्रोजन उत्पादन का सफल प्रदर्शन प्रगत नाभिकीय प्रणाली की बहुउपयोगिता को दर्शाता है और नई प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए आईजीकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।” यह भारत की स्वच्छ ऊर्जा की ओर परिवर्तन एवं दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देगी।
विगत कई वर्षों से, आईजीकार ने रिएक्टर फ़िज़िक्स, थर्मल हाइड्रोलिक्स, एडवांस्ड मटीरियल्स, सोडियम प्रौद्योगिकी, ईंधन चक्र अनुसंधान, इंस्ट्रूमेंटेशन और नियंत्रण प्रणालियों, रिमोट हैंडलिंग, अविनाशी मूल्यांकन और उच्च-ताप अभियांत्रिकी जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त क्षमताएं विकसित की हैं। इसका योगदान भारत की प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता को समृद्ध बनाता है और प्रगत नाभिकीय प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों के बीच अपनी स्थिति को और अधिक शक्तिशाली बनाता है।
इस सुविधा का उद्घाटन नाभिकीय ऊर्जा और स्वच्छ हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी के अभिसरण से ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों को साकार बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह स्वदेशी नवोन्मेष के प्रति परमाणु ऊर्जा विभाग की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा ‘विकसित भारत’ के लिए एक सतत, सुरक्षित और निम्न-कार्बन ऊर्जा भविष्य के निर्माण में भारत के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करता है।